लुटेरों से हमारी लड़ाई, उन्हें अपनी नाक तोड़ने की जरूरत है - राकेश टिकैत ने कहा

लुटेरों से हमारी लड़ाई, उन्हें अपनी नाक तोड़ने की जरूरत है – राकेश टिकैत ने कहा

राकेश टिकैत, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत कृषि कानूनों के विरोध में जगह-जगह आयोजित की जा रही महापंचायतों का हिस्सा बन रहे हैं। हरियाणा के सोनीपत के खरखौदा में अनाज मंडी में एक महापंचायत भी बुलाई गई, जिसमें राकेश टिकैत ने सरकार और कॉरपोरेटों पर जमकर हमला बोला और दोहराया कि वे तब तक घर नहीं लौटेंगे जब तक कि कृषि कानून वापस नहीं हो जाते। राकेश टिकैत ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के एक बयान पर भी पलटवार किया। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि केवल भीड़ इकट्ठा होने के कारण कानून को रद्द नहीं किया जाएगा, बल्कि किसानों को बताना चाहिए कि वे किस प्रावधान को किसान विरोधी पाते हैं।

राकेश टिकैत ने कहा कि राजनेता यह भूल रहे हैं कि भीड़ में सत्ता बदलने की ताकत है। राकेश टिकैत महापंचायत के दौरान भी काफी आक्रामक थे। कॉर्पोरेट और सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनकी नाक (गर्व) को तोड़ने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘यदि आप अब ब्रेक नहीं लगाते हैं, तो वे बेकाबू हो जाएंगे, उन्हें अपनी नाक तोड़ने की जरूरत है, उन्हें अपनी नाक तोड़ने की जरूरत है। आम जनता, किसानों ने उन्हें बहुत ताकत दी, उन्हें अपनी नाक तोड़ने की ज़रूरत है, फिर वे पूरी तरह से काम करेंगे, वे कानून को भी वापस ले लेंगे। प्रतियोगिता है, लुटेरों के साथ प्रतिस्पर्धा है, यह यहां से जाएगा, भागना पड़ेगा। ‘

राकेश टिकैत ने महापंचायत में कहा कि वह देश भर में क्रांति लाएंगे। किसानों को अपने आंदोलन में हल क्रांति के दौरान खेतों में उपयोग किए जाने वाले उपकरण शामिल होंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘देशद्रोह और धारा 307 (हत्या का प्रयास) हम पर लगाया जा रहा है मानो आप प्रसाद वितरित कर रहे हों। उनके नाखून जो काटे गए हैं वे उखड़ जाएंगे।

आपको बता दें कि सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसमें कोई हल नहीं निकला है। किसान आंदोलन का नेतृत्व 40 किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किया जा रहा है, जिसमें भाकियू के राकेश टिकैत सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राकेश टिकैत भी किसानों के अधिकारों के लिए एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने इस बिंदु को महापंचायत के दौरान भी उठाया और कहा, ‘जब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून लागू किया जाएगा, तो किसानों की रक्षा की जाएगी। यह आंदोलन उसके लिए है। यह किसानों के अधिकारों के लिए है। Has राकेश टिकैत यह भी कहते रहे हैं कि किसान भी आंदोलन करेंगे, खेती करेंगे और कृषि के लिए बनाई जा रही नीतियों पर नजर रखेंगे।



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